श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.2.16

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

गुरूणां च लघूनां च गुरूणि च लघूनि च।

प्रायश्चित्तानि पापानां ज्ञात्वोक्तानि महर्षिभिः॥ १६

gurūṇāṃ ca laghūnāṃ ca gurūṇi ca laghūni ca|

prāyaścittāni pāpānāṃ jñātvoktāni maharṣibhiḥ|| 16

अर्थ

महर्षियोंने जान-बूझकर बड़े पापोंके लिये बड़े और छोटे पापोंके लिये छोटे प्रायश्चित्त बतलाये हैं॥ १६॥

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