महर्षियोंने जान-बूझकर बड़े पापोंके लिये बड़े और छोटे पापोंके लिये छोटे प्रायश्चित्त बतलाये हैं॥ १६॥
गुरूणां च लघूनां च गुरूणि च लघूनि च।
प्रायश्चित्तानि पापानां ज्ञात्वोक्तानि महर्षिभिः॥ १६
महर्षियोंने जान-बूझकर बड़े पापोंके लिये बड़े और छोटे पापोंके लिये छोटे प्रायश्चित्त बतलाये हैं॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.2.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 705) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/2/16/