सर्वपापापहारी भगवान्की महिमा सुननेसे अजामिलके हृदयमें शीघ्र ही भक्तिका उदय हो गया। अब उसे अपने पापोंको याद करके बड़ा पश्चात्ताप होने लगा॥ २५॥✎ 497
भक्तिमान् भगवत्याशु माहात्म्यश्रवणाद्धरेः।
अनुतापो महानासीत्स्मरतोऽशुभमात्मनः॥ २५
सर्वपापापहारी भगवान्की महिमा सुननेसे अजामिलके हृदयमें शीघ्र ही भक्तिका उदय हो गया। अब उसे अपने पापोंको याद करके बड़ा पश्चात्ताप होने लगा॥ २५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.2.25 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 709) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/2/25/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)