उनका दर्शन पानेके बाद उन्होंने उस तीर्थस्थानमें गंगाके तटपर अपना शरीर त्याग दिया और तत्काल भगवान्के पार्षदोंका स्वरूप प्राप्त कर लिया॥ ४३॥
हित्वा कलेवरं तीर्थे गङ्गायां दर्शनादनु।
सद्यः स्वरूपं जगृहे भगवत्पार्श्ववर्तिनाम्॥ ४३
उनका दर्शन पानेके बाद उन्होंने उस तीर्थस्थानमें गंगाके तटपर अपना शरीर त्याग दिया और तत्काल भगवान्के पार्षदोंका स्वरूप प्राप्त कर लिया॥ ४३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.2.43 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 711) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/2/43/