राजा परीक्षित्ने पूछा—भगवन्! देवाधिदेव धर्मराजके वशमें सारे जीव हैं और भगवान्के पार्षदोंने उन्हींकी आज्ञा भंग कर दी तथा उनके दूतोंको अपमानित कर दिया। जब उनके दूतोंने यमपुरीमें जाकर उनसे अजामिलका वृत्तान्त कह सुनाया, तब सब कुछ सुनकर उन्होंने अपने दूतोंसे क्या कहा?॥ १॥
निशम्य देवः स्वभटोपवर्णितं
प्रत्याह किं तान् प्रति धर्मराजः।
एवं हताज्ञो विहतान्मुरारे-
र्नैदेशिकैर्यस्य वशे जनोऽयम्॥ १
राजा परीक्षित्ने पूछा—भगवन्! देवाधिदेव धर्मराजके वशमें सारे जीव हैं और भगवान्के पार्षदोंने उन्हींकी आज्ञा भंग कर दी तथा उनके दूतोंको अपमानित कर दिया। जब उनके दूतोंने यमपुरीमें जाकर उनसे अजामिलका वृत्तान्त कह सुनाया, तब सब कुछ सुनकर उन्होंने अपने दूतोंसे क्या कहा?॥ १॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.3.1 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 712) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/3/1/