श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.4.1

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

अथ चतुर्थोऽध्यायः

दक्षके द्वारा भगवान्‌की स्तुति और भगवान्का प्रादुर्भाव✎ 506

राजोवाच

देवासुरनृणां सर्गो नागानां मृगपक्षिणाम्।

सामासिकस्त्वया प्रोक्तो यस्तु स्वायम्भुवेऽन्तरे॥ १

devāsuranṛṇāṃ sargo nāgānāṃ mṛgapakṣiṇām|

sāmāsikastvayā prokto yastu svāyambhuve'ntare|| 1

अर्थ

राजा परीक्षित‍्ने पूछा—भगवन्! आपने संक्षेपसे (तीसरे स्कन्धमें) इस बातका वर्णन किया कि स्वायम्भुव मन्वन्तरमें देवता, असुर, मनुष्य, सर्प और पशु-पक्षी आदिकी सृष्टि कैसे हुई॥ १॥

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