श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.4.17

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

तेभ्यस्तस्यां समभवद्दक्षः प्राचेतसः किल।

यस्य प्रजाविसर्गेण लोका आपूरितास्त्रयः॥ १७

tebhyastasyāṃ samabhavaddakṣaḥ prācetasaḥ kila|

yasya prajāvisargeṇa lokā āpūritāstrayaḥ|| 17

अर्थ

उन्हीं प्रचेताओंके द्वारा उस कन्याके गर्भसे प्राचेतस् दक्षकी उत्पत्ति हुई। फिर दक्षकी प्रजा-सृष्टिसे तीनों लोक भर गये॥ १७॥

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