॥ श्रीहरिः ॥
तेभ्यस्तस्यां समभवद्दक्षः प्राचेतसः किल।
यस्य प्रजाविसर्गेण लोका आपूरितास्त्रयः॥ १७
tebhyastasyāṃ samabhavaddakṣaḥ prācetasaḥ kila|
yasya prajāvisargeṇa lokā āpūritāstrayaḥ|| 17
अर्थ
उन्हीं प्रचेताओंके द्वारा उस कन्याके गर्भसे प्राचेतस् दक्षकी उत्पत्ति हुई। फिर दक्षकी प्रजा-सृष्टिसे तीनों लोक भर गये॥ १७॥
तेभ्यस्तस्यां समभवद्दक्षः प्राचेतसः किल।
यस्य प्रजाविसर्गेण लोका आपूरितास्त्रयः॥ १७
उन्हीं प्रचेताओंके द्वारा उस कन्याके गर्भसे प्राचेतस् दक्षकी उत्पत्ति हुई। फिर दक्षकी प्रजा-सृष्टिसे तीनों लोक भर गये॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.4.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 719) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/4/17/