श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.4.3

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

सूत उवाच

इति सम्प्रश्नमाकर्ण्य राजर्षेर्बादरायणिः।

प्रतिनन्द्य महायोगी१ जगाद मुनिसत्तमाः॥ ३

iti sampraśnamākarṇya rājarṣerbādarāyaṇiḥ|

pratinandya mahāyogī jagāda munisattamāḥ|| 3

अर्थ

सूतजी कहते हैं—शौनकादि ऋषियो! परम योगी व्यासनन्दन श्रीशुकदेवजीने राजर्षि परीक्षित‍्का यह सुन्दर प्रश्न सुनकर उनका अभिनन्दन किया और इस प्रकार कहा॥ ३॥

टिप्पणियाँ

  1. १

    प्रा० पा०—यथायोगी।

    (मुद्रित पृष्ठ 717)

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें