श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.4.7

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 4 · अथ चतुर्थोऽध्यायः

मा द्रुमेभ्यो महाभागा दीनेभ्यो द्रोग्धुमर्हथ।

विवर्धयिषवो यूयं प्रजानां पतयः स्मृताः॥ ७

mā drumebhyo mahābhāgā dīnebhyo drogdhumarhatha|

vivardhayiṣavo yūyaṃ prajānāṃ patayaḥ smṛtāḥ|| 7

अर्थ

‘महाभाग्यवान् प्रचेताओ! ये वृक्ष बड़े दीन हैं। आपलोग इनसे द्रोह मत कीजिये; क्योंकि आप तो प्रजाकी अभिवृद्धि करना चाहते हैं और सभी जानते हैं कि आप प्रजापति हैं॥ ७॥

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