श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.5.36

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 5 · अथ पञ्चमोऽध्यायः

दक्ष उवाच

अहो असाधो साधूनां साधुलिङ्गेन नस्त्वया।

असाध्वकार्यर्भकाणां भिक्षोर्मार्गः प्रदर्शितः॥ ३६

aho asādho sādhūnāṃ sādhuliṅgena nastvayā|

asādhvakāryarbhakāṇāṃ bhikṣormārgaḥ pradarśitaḥ|| 36

अर्थ

दक्षप्रजापतिने कहा—ओ दुष्ट! तुमने झूठमूठ साधुओंका बाना पहन रखा है। हमारे भोले-भाले बालकोंको भिक्षुकोंका मार्ग दिखाकर तुमने हमारा बड़ा अपकार किया है॥ ३६॥

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