tasmāllokeṣu te mūḍha na bhaved bhramataḥ padam|| 43
अर्थ
तुम तो हमारी वंशपरम्पराका उच्छेद करनेपर ही उतारू हो रहे हो। तुमने फिर हमारे साथ वही दुष्टताका व्यवहार किया। इसलिये मूढ़! जाओ, लोक-लोकान्तरोंमें भटकते रहो। कहीं भी तुम्हारे लिये ठहरनेको ठौर नहीं होगी॥ ४३॥
तन्तुकृन्तन यन्नस्त्वमभद्रमचरः पुनः।
तस्माल्लोकेषु ते मूढ न भवेद् भ्रमतः पदम्॥ ४३
तुम तो हमारी वंशपरम्पराका उच्छेद करनेपर ही उतारू हो रहे हो। तुमने फिर हमारे साथ वही दुष्टताका व्यवहार किया। इसलिये मूढ़! जाओ, लोक-लोकान्तरोंमें भटकते रहो। कहीं भी तुम्हारे लिये ठहरनेको ठौर नहीं होगी॥ ४३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.5.43 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 729) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/6/5/43/