वत्स! आचार्य वेदकी, पिता ब्रह्माजीकी, भाई इन्द्रकी और माता साक्षात् पृथ्वीकी मूर्ति होती है॥ २९॥
आचार्यो ब्रह्मणो मूर्तिः पिता मूर्तिः प्रजापतेः।
भ्राता मरुत्पतेर्मूर्तिर्माता साक्षात् क्षितेस्तनुः॥ २९
वत्स! आचार्य वेदकी, पिता ब्रह्माजीकी, भाई इन्द्रकी और माता साक्षात् पृथ्वीकी मूर्ति होती है॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.7.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 737) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/7/29/