॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 6.8.12
ॐ हरिर्विदध्यान्मम सर्वरक्षां
न्यस्ताङ्घ्रिपद्मः पतगेन्द्रपृष्ठे।
दरारिचर्मासिगदेषुचाप-
पाशान् दधानोऽष्टगुणोऽष्टबाहुः॥ १२
oṃ harirvidadhyānmama sarvarakṣāṃ
nyastāṅghripadmaḥ patagendrapṛṣṭhe|
darāricarmāsigadeṣucāpa-
pāśān dadhāno'ṣṭaguṇo'ṣṭabāhuḥ|| 12
अर्थ
‘भगवान् श्रीहरि गरुड़जीकी पीठपर अपने चरणकमल रखे हुए हैं। अणिमादि आठों सिद्धियाँ उनकी सेवा कर रही हैं। आठ हाथोंमें शंख, चक्र, ढाल, तलवार, गदा, बाण, धनुष और पाश (फंदा) धारण किये हुए हैं। वे ही ॐकारस्वरूप प्रभु सब प्रकारसे, सब ओरसे मेरी रक्षा करें॥ १२॥