अब तो देवताओंके आश्चर्यकी सीमा न रही। उनका प्रभाव जाता रहा। वे सब-के-सब दीन-हीन और उदास हो गये तथा एकाग्रचित्तसे अपने हृदयमें विराजमान आदिपुरुष श्रीनारायणकी शरणमें गये॥ २०॥
ततस्ते विस्मिताः सर्वे विषण्णा ग्रस्ततेजसः।
प्रत्यञ्चमादिपुरुषमुपतस्थुः समाहिताः॥ २०
अब तो देवताओंके आश्चर्यकी सीमा न रही। उनका प्रभाव जाता रहा। वे सब-के-सब दीन-हीन और उदास हो गये तथा एकाग्रचित्तसे अपने हृदयमें विराजमान आदिपुरुष श्रीनारायणकी शरणमें गये॥ २०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.9.20 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 746) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/9/20/