श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 6.9.5

षष्ठ स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

सोमपीथं तु यत् तस्य शिर आसीत् कपिञ्जलः।

कलविङ्कः सुरापीथमन्‍नादं यत् स तित्तिरिः॥ ५

somapīthaṃ tu yat tasya śira āsīt kapiñjalaḥ|

kalaviṅkaḥ surāpīthamannādaṃ yat sa tittiriḥ|| 5

अर्थ

विश्‍वरूपका सोमरस पीनेवाला सिर पपीहा, सुरापान करनेवाला गौरैया और अन्‍न खानेवाला तीतर हो गया॥ ५॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें