अब देर मत करो। ऋषिशिरोमणि दधीचिके पास जाओ और उनसे उनका शरीर—जो उपासना, व्रत तथा तपस्याके कारण अत्यन्त दृढ़ हो गया है—माँग लो॥ ५१॥
मघवन् यात भद्रं वो दध्यञ्चमृषिसत्तमम्।
विद्याव्रततपःसारं गात्रं याचत मा चिरम्॥ ५१
अब देर मत करो। ऋषिशिरोमणि दधीचिके पास जाओ और उनसे उनका शरीर—जो उपासना, व्रत तथा तपस्याके कारण अत्यन्त दृढ़ हो गया है—माँग लो॥ ५१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 6.9.51 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 752) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/6/9/51/