भूयः प्राप्स्यथ भद्रं वो न हिंसन्ति च मत्परान्॥ ५५
tasmin vinihate yūyaṃ tejo'strāyudhasampadaḥ|
bhūyaḥ prāpsyatha bhadraṃ vo na hiṃsanti ca matparān|| 55
अर्थ
देवताओ! वृत्रासुरके मर जानेपर तुम लोगोंको फिरसे तेज, अस्त्र-शस्त्र और सम्पत्तियाँ प्राप्त हो जायँगी। तुम्हारा कल्याण अवश्यम्भावी है; क्योंकि मेरे शरणागतोंको कोई सता नहीं सकता॥ ५५॥