भगवत्प्रेमके सौभाग्यसे सम्पन्न महात्मन्! हमारे चित्तमें भगवान्के समत्व आदि गुणोंके सम्बन्धमें बड़ा भारी सन्देह हो रहा है। आप कृपा करके उसे मिटाइये॥ ३॥
इति नः सुमहाभाग नारायणगुणान् प्रति।
संशयः सुमहाञ्जातस्तद्भवांश्छेत्तुमर्हति॥ ३
भगवत्प्रेमके सौभाग्यसे सम्पन्न महात्मन्! हमारे चित्तमें भगवान्के समत्व आदि गुणोंके सम्बन्धमें बड़ा भारी सन्देह हो रहा है। आप कृपा करके उसे मिटाइये॥ ३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.1.3 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 805) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/7/1/3/