श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.1.8

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

जयकाले तु सत्त्वस्य देवर्षीन् रजसोऽसुरान्।

तमसो यक्षरक्षांसि तत्कालानुगुणोऽभजत्॥ ८

jayakāle tu sattvasya devarṣīn rajaso'surān|

tamaso yakṣarakṣāṃsi tatkālānuguṇo'bhajat|| 8

अर्थ

भगवान् समय-समयके अनुसार गुणोंको स्वीकार करते हैं। सत्त्वगुणकी वृद्धिके समय देवता और ऋषियोंका, रजोगुणकी वृद्धिके समय दैत्योंका और तमोगुणकी वृद्धिके समय वे यक्ष एवं राक्षसोंको अपनाते और उनका अभ्युदय करते हैं॥ ८॥

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