श्रीनृसिंहभगवान् बोले—ब्रह्माजी! आप दैत्योंको ऐसा वर न दिया करें। जो स्वभावसे ही क्रूर हैं, उनको दिया हुआ वर तो वैसा ही है जैसा साँपोंको दूध पिलाना॥ ३०॥
मैवं वरोऽसुराणां ते प्रदेयः पद्मसम्भव।
वरः क्रूरनिसर्गाणामहीनाममृतं यथा॥ ३०
श्रीनृसिंहभगवान् बोले—ब्रह्माजी! आप दैत्योंको ऐसा वर न दिया करें। जो स्वभावसे ही क्रूर हैं, उनको दिया हुआ वर तो वैसा ही है जैसा साँपोंको दूध पिलाना॥ ३०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.10.30 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 870) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/10/30/