तब लोकपालोंके साथ सारी प्रजा भगवान् शंकरकी शरणमें गयी और उनसे प्रार्थना की कि ‘प्रभो! त्रिपुरमें रहनेवाले असुर हमारा नाश कर रहे हैं। हम आपके हैं; अतः देवाधिदेव! आप हमारी रक्षा कीजिये’॥ ५६॥
ततस्ते सेश्वरा लोका उपासाद्येश्वरं विभो।
त्राहि नस्तावकान्देव विनष्टांस्त्रिपुरालयैः॥ ५६
तब लोकपालोंके साथ सारी प्रजा भगवान् शंकरकी शरणमें गयी और उनसे प्रार्थना की कि ‘प्रभो! त्रिपुरमें रहनेवाले असुर हमारा नाश कर रहे हैं। हम आपके हैं; अतः देवाधिदेव! आप हमारी रक्षा कीजिये’॥ ५६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.10.56 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 873) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/10/56/