श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.10.61

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

विलोक्य भग्नसङ्कल्पं विमनस्कं वृषध्वजम्।

तदायं भगवान्विष्णुस्तत्रोपायमकल्पयत्॥ ६१

vilokya bhagnasaṅkalpaṃ vimanaskaṃ vṛṣadhvajam|

tadāyaṃ bhagavānviṣṇustatropāyamakalpayat|| 61

अर्थ

इन्हीं भगवान् श्रीकृष्णने जब देखा कि महादेवजी तो अपना संकल्प पूरा न होनेके कारण उदास हो गये हैं, तब उन असुरोंपर विजय प्राप्त करनेके लिये इन्होंने एक युक्ति की॥ ६१॥

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