श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.10.69

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

देवर्षिपितृसिद्धेशा जयेति कुसुमोत्करैः।

अवाकिरञ्जगुर्हृष्टा ननृतुश्चाप्सरोगणाः॥ ६९

devarṣipitṛsiddheśā jayeti kusumotkaraiḥ|

avākirañjagurhṛṣṭā nanṛtuścāpsarogaṇāḥ|| 69

अर्थ

देवता, ऋषि, पितर और सिद्धेश्‍वर आनन्दसे जय-जयकार करते हुए पुष्पोंकी वर्षा करने लगे। अप्सराएँ नाचने और गाने लगीं॥ ६९॥

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