इस प्रकार आचरण करनेवाला ब्रह्मचारी, वानप्रस्थ, संन्यासी अथवा गृहस्थ विज्ञानसम्पन्न होकर परब्रह्मतत्त्वका अनुभव प्राप्त कर लेता है॥ १६॥
एवंविधो ब्रह्मचारी वानप्रस्थो यतिर्गृही।
चरन्विदितविज्ञानः परं ब्रह्माधिगच्छति॥ १६
इस प्रकार आचरण करनेवाला ब्रह्मचारी, वानप्रस्थ, संन्यासी अथवा गृहस्थ विज्ञानसम्पन्न होकर परब्रह्मतत्त्वका अनुभव प्राप्त कर लेता है॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.12.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 880) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/12/16/