॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 7.12.20
agnyarthameva śaraṇamuṭajaṃ vādrikandarām|
śrayeta himavāyvagnivarṣārkātapaṣāṭ svayam|| 20
अर्थ
अग्निहोत्रके अग्निकी रक्षाके लिये ही घर, पर्णकुटी अथवा पहाड़की गुफाका आश्रय ले। स्वयं शीत, वायु, अग्नि, वर्षा और घामका सहन करे॥ २०॥
टिप्पणियाँ
- ५
प्रा० पा०—कन्दरम्।
- ६
प्रा० पा०—तपमाश्रयम्।