वानप्रस्थी पुरुष जब रोग अथवा बुढ़ापेके कारण अपने कर्म पूरे न कर सके और वेदान्त-विचार करनेकी भी सामर्थ्य न रहे, तब उसे अनशन आदि व्रत करने चाहिये॥ २३॥
यदाकल्पः स्वक्रियायां व्याधिभिर्जरयाथवा।
आन्वीक्षिक्यां वा विद्यायां कुर्यादनशनादिकम्॥ २३
वानप्रस्थी पुरुष जब रोग अथवा बुढ़ापेके कारण अपने कर्म पूरे न कर सके और वेदान्त-विचार करनेकी भी सामर्थ्य न रहे, तब उसे अनशन आदि व्रत करने चाहिये॥ २३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.12.23 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 881) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/12/23/