श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.12.8

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

केशप्रसाधनोन्मर्दस्नपनाभ्यञ्जनादिकम् ।

गुरुस्त्रीभिर्युवतिभिः कारयेन्‍नात्मनो युवा॥ ८

keśaprasādhanonmardasnapanābhyañjanādikam |

gurustrībhiryuvatibhiḥ kārayennātmano yuvā|| 8

अर्थ

युवक ब्रह्मचारी युवती गुरुपत्नियोंसे बाल सुलझवाना, शरीर मलवाना, स्नान करवाना, उबटन लगवाना इत्यादि कार्य न करावे॥ ८॥

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