vairāgyaṃ paritoṣaṃ ca prāptā yacchikṣayā vayam|| 34
अर्थ
इस लोकमें मेरे सबसे बड़े गुरु हैं—अजगर और मधुमक्खी। उनकी शिक्षासे हमें वैराग्य और सन्तोषकी प्राप्ति हुई है॥ ३४॥
मधुकारमहासर्पौ लोकेऽस्मिन्नो गुरूत्तमौ।
वैराग्यं परितोषं च प्राप्ता यच्छिक्षया वयम्॥ ३४
इस लोकमें मेरे सबसे बड़े गुरु हैं—अजगर और मधुमक्खी। उनकी शिक्षासे हमें वैराग्य और सन्तोषकी प्राप्ति हुई है॥ ३४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.13.34 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 887) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/13/34/