श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.14.7

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 14 · अथ चतुर्दशोऽध्यायः

दिव्यं भौमं चान्तरिक्षं वित्तमच्युतनिर्मितम्।

तत् सर्वमुपभुञ्जान एतत् कुर्यात् स्वतो बुधः॥ ७

divyaṃ bhaumaṃ cāntarikṣaṃ vittamacyutanirmitam|

tat sarvamupabhuñjāna etat kuryāt svato budhaḥ|| 7

अर्थ

बुद्धिमान् पुरुष वर्षा आदिके द्वारा होनेवाले अन्‍नादि, पृथ्वीसे उत्पन्‍न होनेवाले सुवर्ण आदि, अकस्मात् प्राप्त होनेवाले द्रव्य आदि तथा और सब प्रकारके धन भगवान्‌के ही दिये हुए हैं—ऐसा समझकर प्रारब्धके अनुसार उनका उपभोग करता हुआ संचय न करे, उन्हें पूर्वोक्त साधुसेवा आदि कर्मोंमें लगा दे॥ ७॥

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