श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.15.21

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

पण्डिता बहवो राजन्बहुज्ञाः संशयच्छिदः।

सदसस्पतयोऽप्येके असन्तोषात् पतन्त्यधः॥ २१

paṇḍitā bahavo rājanbahujñāḥ saṃśayacchidaḥ|

sadasaspatayo'pyeke asantoṣāt patantyadhaḥ|| 21

अर्थ

अनेक विषयोंके ज्ञाता, शंकाओंका समाधान करके चित्तमें शास्त्रोक्त अर्थको बैठा देनेवाले और विद्वत्सभाओंके सभापति बड़े-बड़े विद्वान् भी असन्तोषके कारण गिर जाते हैं॥ २१॥

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