श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.15.32

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

प्राणापानौ सन्‍निरुन्ध्यात् पूरकुम्भकरेचकैः।

यावन्मनस्त्यजेत् कामान् स्वनासाग्रनिरीक्षणः॥ ३२

prāṇāpānau sannirundhyāt pūrakumbhakarecakaiḥ|

yāvanmanastyajet kāmān svanāsāgranirīkṣaṇaḥ|| 32

अर्थ

जबतक मन संकल्प-विकल्पोंको छोड़ न दे, तबतक नासिकाके अग्रभागपर दृष्टि जमाकर पूरक, कुम्भक और रेचकद्वारा प्राण तथा अपानकी गतिको रोके॥ ३२॥

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