श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.2.16

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

एवं विप्रकृते लोके दैत्येन्द्रानुचरैर्मुहुः।

दिवं देवाः परित्यज्य भुवि चेरुरलक्षिताः॥ १६

evaṃ viprakṛte loke daityendrānucarairmuhuḥ|

divaṃ devāḥ parityajya bhuvi ceruralakṣitāḥ|| 16

अर्थ

इस प्रकार दैत्योंने निरीह प्रजाका बड़ा उत्पीड़न किया। उस समय देवतालोग स्वर्ग छोड़कर छिपे रूपसे पृथ्वीमें विचरण करते थे॥ १६॥✎ 2017 2018

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #2017 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि
  • #2018 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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