श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.2.39

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

य इच्छयेशः सृजतीदमव्ययो

य एव रक्षत्यवलुम्पते च यः।

तस्याबलाः क्रीडनमाहुरीशितु-

श्‍चराचरं निग्रहसङ्ग्रहे प्रभुः॥ ३९

ya icchayeśaḥ sṛjatīdamavyayo

ya eva rakṣatyavalumpate ca yaḥ|

tasyābalāḥ krīḍanamāhurīśitu-

ścarācaraṃ nigrahasaṅgrahe prabhuḥ|| 39

अर्थ

देवियो! जो अविनाशी ईश्‍वर अपनी मौजसे इस जगत‍्को बनाता है, रखता है और बिगाड़ देता है—उस प्रभुका यह एक खिलौनामात्र है। वह इस चराचर जगत‍्को दण्ड या पुरस्कार देनेमें समर्थ है॥ ३९॥✎ 2019

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #2019 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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