mandabhāgyāḥ pratīkṣante nīḍe me mātaraṃ prajāḥ|| 55
अर्थ
अभी मेरे अभागे बच्चोंके पर भी नहीं जमे हैं। स्त्रीके मर जानेपर उन मातृहीन बच्चोंको मैं कैसे पालूँगा? ओह! घोंसलेमें वे अपनी माँकी बाट देख रहे होंगे’॥ ५५॥✎ 2020
कथं त्वजातपक्षांस्तान् मातृहीनान् बिभर्म्यहम्।
मन्दभाग्याः प्रतीक्षन्ते नीडे मे मातरं प्रजाः॥ ५५
अभी मेरे अभागे बच्चोंके पर भी नहीं जमे हैं। स्त्रीके मर जानेपर उन मातृहीन बच्चोंको मैं कैसे पालूँगा? ओह! घोंसलेमें वे अपनी माँकी बाट देख रहे होंगे’॥ ५५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.2.55 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 817) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/2/55/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)