बादलोंसे ढके हुए सूर्यके समान वह अपनी तपस्याके तेजसे लोकोंको तपा रहा था। उसको देखकर ब्रह्माजी भी विस्मित हो गये। उन्होंने हँसते हुए कहा॥ १६॥
तपन्तं तपसा लोकान् यथाभ्रापिहितं रविम्।
विलक्ष्य विस्मितः प्राह प्रहसन् हंसवाहनः॥ १६
बादलोंसे ढके हुए सूर्यके समान वह अपनी तपस्याके तेजसे लोकोंको तपा रहा था। उसको देखकर ब्रह्माजी भी विस्मित हो गये। उन्होंने हँसते हुए कहा॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.3.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 820) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/3/16/