उसने देखा कि आकाशमें हंसपर चढ़े हुए ब्रह्माजी खड़े हैं। उन्हें देखकर उसे बड़ा आनन्द हुआ। अपना सिर पृथ्वीपर रखकर उसने उनको नमस्कार किया॥ २४॥
स निरीक्ष्याम्बरे देवं हंसवाहमवस्थितम्।
ननाम शिरसा भूमौ तद्दर्शनमहोत्सवः॥ २४
उसने देखा कि आकाशमें हंसपर चढ़े हुए ब्रह्माजी खड़े हैं। उन्हें देखकर उसे बड़ा आनन्द हुआ। अपना सिर पृथ्वीपर रखकर उसने उनको नमस्कार किया॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.3.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 821) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/3/24/