श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.3.34

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

अनन्ताव्यक्तरूपेण येनेदमखिलं ततम्।

चिदचिच्छक्तियुक्ताय तस्मै भगवते नमः॥ ३४

anantāvyaktarūpeṇa yenedamakhilaṃ tatam|

cidacicchaktiyuktāya tasmai bhagavate namaḥ|| 34

अर्थ

आप अपने अनन्त और अव्यक्त स्वरूपसे सारे जगत‍्में व्याप्त हैं। चेतन और अचेतन दोनों ही आपकी शक्तियाँ हैं। भगवन्! मैं आपको नमस्कार करता हूँ॥ ३४॥

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