जब यह अपने वैरहीन, शान्त और महात्मा पुत्र प्रह्लादसे द्रोह करेगा—उसका अनिष्ट करना चाहेगा, तब वरके कारण शक्तिसम्पन्न होनेपर भी इसे मैं अवश्य मार डालूँगा।’॥ २८॥
निर्वैराय प्रशान्ताय स्वसुताय महात्मने।
प्रह्रादाय यदा द्रुह्येद्धनिष्येऽपि वरोर्जितम्॥ २८
जब यह अपने वैरहीन, शान्त और महात्मा पुत्र प्रह्लादसे द्रोह करेगा—उसका अनिष्ट करना चाहेगा, तब वरके कारण शक्तिसम्पन्न होनेपर भी इसे मैं अवश्य मार डालूँगा।’॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.4.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 825) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/4/28/