श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.6.9

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

को गृहेषु पुमान्सक्तमात्मानमजितेन्द्रियः।

स्नेहपाशैर्दृढैर्बद्धमुत्सहेत विमोचितुम्॥ ९

ko gṛheṣu pumānsaktamātmānamajitendriyaḥ|

snehapāśairdṛḍhairbaddhamutsaheta vimocitum|| 9

अर्थ

दैत्यबालको! जिसकी इन्द्रियाँ वशमें नहीं हैं, ऐसा कौन-सा पुरुष होगा, जो घर-गृहस्थीमें आसक्त और माया-ममताकी मजबूत फाँसीमें फँसे हुए अपने-आपको उससे छुड़ानेका साहस कर सके॥ ९॥

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