जब गुरुजीने देखा कि उन सभी विद्यार्थियोंकी बुद्धि एकमात्र भगवान्में स्थिर हो रही है, तब वे बहुत घबराये और तुरंत हिरण्यकशिपुके पास जाकर निवेदन किया॥ २॥✎ 604
अथाचार्यसुतस्तेषां बुद्धिमेकान्तसंस्थिताम्।
आलक्ष्य भीतस्त्वरितो राज्ञ आवेदयद् यथा॥ २
जब गुरुजीने देखा कि उन सभी विद्यार्थियोंकी बुद्धि एकमात्र भगवान्में स्थिर हो रही है, तब वे बहुत घबराये और तुरंत हिरण्यकशिपुके पास जाकर निवेदन किया॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.8.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 847) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/8/2/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#604 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् में → भगवान्में