॥ श्रीहरिः ॥
तदा विमानावलिभिर्नभस्तलं
दिदृक्षतां सङ्कुलमास नाकिनाम्।
सुरानका दुन्दुभयोऽथ जघ्निरे
गन्धर्वमुख्या ननृतुर्जगुः स्त्रियः॥ ३६
tadā vimānāvalibhirnabhastalaṃ
didṛkṣatāṃ saṅkulamāsa nākinām|
surānakā dundubhayo'tha jaghnire
gandharvamukhyā nanṛturjaguḥ striyaḥ|| 36
अर्थ
आकाशमें विमानोंसे आये हुए भगवान्के दर्शनार्थी देवताओंकी भीड़ लग गयी। देवताओंके ढोल और नगारे बजने लगे। गन्धर्वराज गाने लगे, अप्सराएँ नाचने लगीं॥ ३६॥✎ 616
तदा विमानावलिभिर्नभस्तलं
दिदृक्षतां सङ्कुलमास नाकिनाम्।
सुरानका दुन्दुभयोऽथ जघ्निरे
गन्धर्वमुख्या ननृतुर्जगुः स्त्रियः॥ ३६
आकाशमें विमानोंसे आये हुए भगवान्के दर्शनार्थी देवताओंकी भीड़ लग गयी। देवताओंके ढोल और नगारे बजने लगे। गन्धर्वराज गाने लगे, अप्सराएँ नाचने लगीं॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.8.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 853) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/8/36/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
- #616 शब्दोंके बीचका स्थान: नृसिंहभगवान् की → नृसिंहभगवान्की