yo no gatiṃ yogasiddhāmasādhurahāraṣīd yogatapobalena|
nānādarpaṃ taṃ nakhairnirdadāra tasmai tubhyaṃ praṇatāḥ smo nṛsiṃha|| 45
अर्थ
सिद्धोंने कहा—नृसिंहदेव! इस दुष्टने अपने योग और तपस्याके बलसे हमारी योगसिद्ध गति छीन ली थी। अपने नखोंसे आपने उस घमंडीको फाड़ डाला है। हम आपके चरणोंमें विनीतभावसे नमस्कार करते हैं॥ ४५॥
यो नो गतिं योगसिद्धामसाधुरहारषीद् योगतपोबलेन।
नानादर्पं तं नखैर्निर्ददार तस्मै तुभ्यं प्रणताः स्मो नृसिंह॥ ४५
सिद्धोंने कहा—नृसिंहदेव! इस दुष्टने अपने योग और तपस्याके बलसे हमारी योगसिद्ध गति छीन ली थी। अपने नखोंसे आपने उस घमंडीको फाड़ डाला है। हम आपके चरणोंमें विनीतभावसे नमस्कार करते हैं॥ ४५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 7.8.45 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 854) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/7/8/45/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)