श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.8.48

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

मनव ऊचुः

मनवो वयं तव निदेशकारिणो

दितिजेन देव परिभूतसेतवः।

भवता खलः स उपसंहृतः प्रभो

करवाम ते किमनुशाधि किङ्करान्॥ ४८

manavo vayaṃ tava nideśakāriṇo

ditijena deva paribhūtasetavaḥ|

bhavatā khalaḥ sa upasaṃhṛtaḥ prabho

karavāma te kimanuśādhi kiṅkarān|| 48

अर्थ

मनुओंने कहा—देवाधिदेव! हम आपके आज्ञाकारी मनु हैं। इस दैत्यने हमलोगोंकी धर्ममर्यादा भंग कर दी थी। आपने उस दुष्टको मारकर बड़ा उपकार किया है। प्रभो! हम आपके सेवक हैं। आज्ञा कीजिये, हम आपकी क्या सेवा करें?॥ ४८॥

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