श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.9.1

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

अथ नवमोऽध्यायः

प्रह्लादजीके द्वारा नृसिंहभगवान्‌की स्तुति✎ 617

नारद उवाच

एवं सुरादयः सर्वे ब्रह्मरुद्रपुरःसराः।

नोपैतुमशकन्मन्युसंरम्भं सुदुरासदम्॥ १

evaṃ surādayaḥ sarve brahmarudrapuraḥsarāḥ|

nopaitumaśakanmanyusaṃrambhaṃ sudurāsadam|| 1

अर्थ

नारदजी कहते हैं—इस प्रकार ब्रह्मा, शंकर आदि सभी देवगण नृसिंहभगवान्‌के क्रोधावेशको शान्त न कर सके और न उनके पास जा सके। किसीको उसका ओर-छोर नहीं दीखता था॥ १॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें