श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.1.25

नवम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

स कुमारो वनं मेरोरधस्तात् प्रविवेश ह।

यत्रास्ते भगवाञ्छर्वो रममाणः सहोमया॥ २५

sa kumāro vanaṃ meroradhastāt praviveśa ha|

yatrāste bhagavāñcharvo ramamāṇaḥ sahomayā|| 25

अर्थ

अन्तमें सुद्युम्‍न मेरुपर्वतकी तलहटीके एक वनमें चले गये। उस वनमें भगवान् शंकर पार्वतीके साथ विहार करते रहते हैं॥ २५॥

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