॥ श्रीहरिः ॥
सापि तं चकमे सुभ्रूः सोमराजसुतं पतिम्।
स तस्यां जनयामास पुरूरवसमात्मजम्॥ ३५
sāpi taṃ cakame subhrūḥ somarājasutaṃ patim|
sa tasyāṃ janayāmāsa purūravasamātmajam|| 35
अर्थ
उस सुन्दरी स्त्रीने भी चन्द्रकुमार बुधको पति बनाना चाहा। इसपर बुधने उसके गर्भसे पुरूरवा नामका पुत्र उत्पन्न किया॥ ३५॥
सापि तं चकमे सुभ्रूः सोमराजसुतं पतिम्।
स तस्यां जनयामास पुरूरवसमात्मजम्॥ ३५
उस सुन्दरी स्त्रीने भी चन्द्रकुमार बुधको पति बनाना चाहा। इसपर बुधने उसके गर्भसे पुरूरवा नामका पुत्र उत्पन्न किया॥ ३५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.1.35 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 10) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/1/35/