श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.10.19

नवम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

तां यातुधानपृतनामसिशूलचाप-

प्रासर्ष्टिशक्तिशरतोमरखड्गदुर्गाम् ।

सुग्रीवलक्ष्मणमरुत्सुतगन्धमाद-

नीलांगदर्क्षपनसादिभिरन्वितोऽगात्॥ १९

tāṃ yātudhānapṛtanāmasiśūlacāpa-

prāsarṣṭiśaktiśaratomarakhaḍgadurgām |

sugrīvalakṣmaṇamarutsutagandhamāda-

nīlāṃgadarkṣapanasādibhiranvito'gāt|| 19

अर्थ

राक्षसोंकी वह विशाल सेना तलवार, त्रिशूल, धनुष, प्रास, ऋष्टि, शक्ति, बाण, भाले, खड्ग आदि शस्त्र-अस्त्रोंसे सुरक्षित और अत्यन्त दुर्गम थी। भगवान् श्रीरामने सुग्रीव, लक्ष्मण, हनूमान्, गन्धमादन, नील, अंगद, जाम्बवान् और पनस आदि वीरोंको अपने साथ लेकर राक्षसोंकी सेनाका सामना किया॥ १९॥✎ 1638

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1638 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: गन्ध-मादन, → गन्धमादन,

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