श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.10.24

नवम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

ततो निष्क्रम्य लंकाया यातुधान्यः सहस्रशः।

मन्दोदर्या समं तस्मिन् प्र२रुदत्य उपाद्रवन्॥ २४

tato niṣkramya laṃkāyā yātudhānyaḥ sahasraśaḥ|

mandodaryā samaṃ tasmin prarudatya upādravan|| 24

अर्थ

तदनन्तर हजारों राक्षसियाँ मन्दोदरीके साथ रोती हुई लंकासे निकल पड़ीं और रणभूमिमें आयीं॥ २४॥

टिप्पणियाँ

  1. २

    रुदत्यस्ता०।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 56)

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