इसके बाद भगवान् श्रीरामने ब्रह्मचर्य धारण करके तेरह हजार वर्षतक अखण्डरूपसे अग्निहोत्र किया॥ १८॥
तत ऊर्ध्वं ब्रह्मचर्यं धारयन्नजुहोत् प्रभुः।
त्रयोदशाब्दसाहस्रमग्निहोत्रमखण्डितम्॥ १८
इसके बाद भगवान् श्रीरामने ब्रह्मचर्य धारण करके तेरह हजार वर्षतक अखण्डरूपसे अग्निहोत्र किया॥ १८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.11.18 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 62) · https://srimad-bhagavatam.vidhyamitra.com/9/11/18/