श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.11.22

नवम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

स यैः स्पृष्टोऽभिदृष्टो वा संविष्टोऽनुगतोऽपि वा।

कोसलास्ते ययुः स्थानं यत्र गच्छन्ति योगिनः॥ २२

sa yaiḥ spṛṣṭo'bhidṛṣṭo vā saṃviṣṭo'nugato'pi vā|

kosalāste yayuḥ sthānaṃ yatra gacchanti yoginaḥ|| 22

अर्थ

जिन्होंने भगवान् श्रीरामका दर्शन और स्पर्श किया, उनका सहवास अथवा अनुगमन किया—वे सब-के-सब तथा कोसलदेशके निवासी भी उसी लोकमें गये, जहाँ बड़े-बड़े योगी योग-साधनाके द्वारा जाते हैं॥ २२॥

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