श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.11.24

नवम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

राजोवाच

कथं स भगवान् रामो भ्रातॄन् वा स्वयमात्मनः।

तस्मिन् वा तेऽन्ववर्तन्त प्रजाः पौराश्‍च ईश्‍वरे॥ २४

kathaṃ sa bhagavān rāmo bhrātṝn vā svayamātmanaḥ|

tasmin vā te'nvavartanta prajāḥ paurāśca īśvare|| 24

अर्थ

राजा परीक्षित‍्ने पूछा—भगवान् श्रीराम स्वयं अपने भाइयोंके साथ किस प्रकारका व्यवहार करते थे? तथा भरत आदि भाई, प्रजाजन और अयोध्यावासी भगवान् श्रीरामके प्रति कैसा बर्ताव करते थे?॥ २४॥

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें